देसी फ़िल्मों का कारोबार
सार: मेरा शोध पश्चिमी उत्तर प्रदेश की देसी फ़िल्मों के फलते-फूलते और लगातार बढ़ते व्यवसाय और उसकी अंतर्वस्तु को लेकर है। वैसे तो मैं इस विषय पर एक पूरी किताब लिखने जा रहा हूँ, लेकिन वर्कशॉप में में मैं कुछ चुनिंदा पहलू ही पेश कर पाउँगा: जैसे कि इन देसी फ़िल्मों का संक्षिप्त इतिहास, ये बनती कैसे हैं, इनके कथानक क्या हैं, शैलियाँ कौन सी हैं, इनके नायक-नायिकाओं व निर्माताओं का कार्य-जीवन कैसा है, लोग इन्हें कैसे देखते हैं, और मीडिया में आने के बाद इनका जीवन कैसे बदलता है।

Bio: Anil Pandey is currently a Principal Correspondent with the newsmagazine, Business & Economy. He has worked with Jansatta for five years as a reporter and has taught journalism for another five years at the Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalaya, NOIDA.

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